श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 10: द्वारका के लिए भगवान् कृष्ण का प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक
उषित्वा हास्तिनपुरे मासान् कतिपयान् हरि: ।
सुहृदां च विशोकाय स्वसुश्च प्रियकाम्यया ॥ ७ ॥
 
शब्दार्थ
उषित्वा—ठहर कर; हास्तिनपुरे—हस्तिनापुर नगर में; मासान्—महीने; कतिपयान्—कुछ; हरि:—भगवान् श्रीकृष्ण; सुहृदाम्—सम्बन्धियों को; च—भी; विशोकाय—सान्त्वना देने के लिए; स्वसु:—बहन को; च—तथा; प्रिय- काम्यया—प्रसन्न करने के लिए ।.
 
अनुवाद
 
 श्री हरि अपने सम्बन्धियों को सान्त्वना देने तथा अपनी बहन (सुभद्रा) को प्रसन्न करने के लिए कुछ महीने हस्तिनापुर में रहे।
 
तात्पर्य
 कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद एवं युधिष्ठिर के सिंहासनारूढ़ होने पर, श्रीकृष्ण को अपने राज्य द्वारका के लिए प्रस्थान करना था, लेकिन महाराज युधिष्ठिर को अनुगृहीत करने तथा भीष्मदेव पर विशेष अनुग्रह करने के लिए भगवान् कृष्ण पाण्डवों की राजधानी हस्तिनापुर में रुके रहे। भगवान् ने संतप्त राजा को सान्त्वना देने तथा अपनी बहन सुभद्रा को प्रसन्न करने के लिए भी रुकने का निश्चय
किया। सुभद्रा को विशेष रूप से सान्त्वना दिये जाने की आवश्यकता थी, क्योंकि उसका एकमात्र पुत्र, अभिमन्यु, जिसकी शादी हाल ही में हुई थी, मारा गया था। वह युवक अपनी पत्नी, महाराज परीक्षित की माता, उत्तरा को छोडक़र मरा था। भगवान् को अपने भक्तों को प्रसन्न करने में प्रसन्नता होती है। केवल उनके भक्त ही उनके सम्बन्धियों की भूमिका अदा कर सकते हैं। भगवान् तो परम पूर्ण हैं।
 
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥