श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 12: सम्राट परीक्षित का जन्म  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक
तमूचुर्ब्राह्मणास्तुष्टा राजानं प्रश्रयान्वितम् ।
एष ह्यस्मिन् प्रजातन्तौ पुरूणां पौरवर्षभ ॥ १५ ॥
 
शब्दार्थ
तम्—उसको; ऊचु:—सम्बोधित किया; ब्राह्मणा:—विद्वान ब्राह्मणों ने; तुष्टा:—अत्यधिक सन्तुष्ट; राजानम्—राजा को; प्रश्रय- अन्वितम्—अत्यधिक कृतज्ञता ज्ञापित करके; एष:—यह; हि—निश्चय ही; अस्मिन्—की शृंखला में; प्रजा-तन्तौ—परम्परा में; पुरूणाम्—पुरुओं की; पौरव-ऋषभ—पुरुओं में प्रमुख ।.
 
अनुवाद
 
 राजा के दान से अत्यधिक सन्तुष्ट विद्वान ब्राह्मणों ने राजा को पुरुओं में प्रधान कहकर सम्बोधित किया और बताया कि उनका पुत्र निश्चय ही पुरुओं की परम्परा में है।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥