श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 12: सम्राट परीक्षित का जन्म  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक
अङ्गुष्ठमात्रममलं स्फुरत्पुरटमौलिनम् ।
अपीव्यदर्शनं श्यामं तडिद्वाससमच्युतम् ॥ ८ ॥
 
शब्दार्थ
अङ्गुष्ठ—अँगूठे की माप का; मात्रम्—केवल; अमलम्—दिव्य; स्फुरत्—देदीप्यमान; पुरट—सोना; मौलिनम्—मुकुट; अपीव्य—अत्यन्त सुन्दर; दर्शनम्—देखने के लिए; श्यामम्—श्याम रंग; तडित्—बिजली; वाससम्—वस्त्र; अच्युतम्—अच्युत (भगवान्) को ।.
 
अनुवाद
 
 वे (भगवान्) केवल अँगूठा भर ऊँचे थे, किन्तु वे थे पूर्णत: दिव्य। उनका शरीर अत्यन्त सुन्दर, श्याम वर्ण का तथा अच्युत था और उनका वस्त्र बिजली के समान चमचमाता पीतवर्ण का तथा उनका मुकुट देदीप्यमान सोने का था। बालक ने उन्हें इस रूप में देखा।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥