श्रीमद् भागवतम
 
हिंदी में पढ़े और सुनें
भागवत पुराण  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 6: नारद तथा व्यासदेव का संवाद  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक
एकदा निर्गतां गेहाद्दुहन्तीं निशि गां पथि ।
सर्पोऽदशत्पदा स्पृष्ट: कृपणां कालचोदित: ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
एकदा—एक बार; निर्गताम्—चले जाने पर; गेहात्—घर से; दुहन्तीम्—दुहने के लिए; निशि—रात्रि में; गाम्—गाय को; पथि—रास्ते में; सर्प:—सर्प ने; अदशत्—डस लिया; पदा—पाँव में; स्पृष्ट:—इस प्रकार काटी गई; कृपणाम्— बेचारी स्त्री; काल-चोदित:—परम काल के वशीभूत हो कर ।.
 
अनुवाद
 
 एक बार जब मेरी माँ बेचारी रात्रि के समय गाय दुहने जा रही थी, तो परम काल से प्रेरित एक सर्प ने मेरी माता के पाँव में डस लिया।
 
तात्पर्य
 एक सत्यनिष्ठ आत्मा को ईश्वर के पास खींच लाने की यह विधि है। बेचारा बालक केवल अपनी स्नेहमयी माता की देख-भाल में रह रहा था, तो भी उसकी माता को परम इच्छा के फलस्वरूप इस संसार से उठा लिया गया, जिससे वह बालक पूर्ण रूप से भगवान् की कृपा पर आश्रित हो जाय।
 
शेयर करें
       
 
  All glories to Srila Prabhupada. All glories to वैष्णव भक्त-वृंद
  Disclaimer: copyrights reserved to BBT India and BBT Intl.

 
About Us | Terms & Conditions
Privacy Policy | Refund Policy
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥