श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 1: सृष्टि  »  अध्याय 9: भगवान् कृष्ण की उपस्थिति में भीष्मदेव का देह-त्याग  »  श्लोक 4

 
श्लोक
द‍ृष्ट्वा निपतितं भूमौ दिवश्‍च्युतमिवामरम् ।
प्रणेमु: पाण्डवा भीष्मं सानुगा: सह चक्रिणा ॥ ४ ॥
 
शब्दार्थ
दृष्ट्वा—देखकर; निपतितम्—लेटे; भूमौ—भूमि पर; दिव:—आकाश से; च्युतम्—गिरे हुए; इव—सदृश; अमरम्— देवता; प्रणेमु:—प्रणाम किया; पाण्डवा:—पाण्डु-पुत्रों ने; भीष्मम्—भीष्म को; स-अनुगा:—अपने छोटे भाइयों सहित; सह—सहित; चक्रिणा—चक्रधारी भगवान् ।.
 
अनुवाद
 
 आकाश से आ गिरे देवता के समान उन्हें (भीष्मदेव को) भूमि पर लेटे देखकर पाण्डव-सम्राट युधिष्ठिर ने अपने छोटे भाइयों तथा भगवान् कृष्ण समेत उन्हें प्रणाम किया।
 
तात्पर्य
 भगवान् कृष्ण भी महाराज युधिष्ठिर के ममेरे भाई तथा अर्जुन के अन्तरंग सखा थे। लेकिन सारा पाण्डव-परिवार कृष्ण को पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान् के रूप में जानता था। भगवान् को,
यद्यपि अपने परम पद का आभास रहता था, तो भी वे मनुष्य की तरह आचरण करते थे, अतएव उन्होंने भी मरणासन्न भीष्मदेव को अपने को राजा युधिष्ठिर का छोटा भाई मानकर प्रणाम किया।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥