श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 34

 
श्लोक
पथि प्रग्रहिणं कंसमाभाष्याहाशरीरवाक् ।
अस्यास्त्वामष्टमो गर्भो हन्ता यां वहसेऽबुध ॥ ३४ ॥
 
शब्दार्थ
पथि—रास्ते में; प्रग्रहिणम्—घोड़ों की लगाम थामे हुए; कंसम्—कंस को; आभाष्य—सम्बोधित करते हुए; आह—कहा; अ- शरीर-वाक्—अदृश्य शरीर से आने वाली आवाज ने; अस्या:—इस (देवकी) का; त्वाम्—तुमको; अष्टम:—आठवाँ; गर्भ:— गर्भ; हन्ता—मारने वाला; याम्—जिसको; वहसे—लिए जा रहे हो; अबुध—हे मूर्ख ।.
 
अनुवाद
 
 जब कंस घोड़ों की लगाम थामे मार्ग पर रथ हाँक रहा था, तो किसी अशरीरी आवाज ने उसको सम्बोधित किया, “अरे मूर्ख दुष्ट! तुम जिस स्त्री को लिए जा रहे हो उसकी आठवीं सन्तान तुम्हारा वध करेगी।”
 
तात्पर्य
 इस भविष्यवाणी में अष्टमोगर्भ: की बात थी, किन्तु स्पष्ट नहीं बतलाया गया था कि वह लडक़ा होगा या लडक़ी। यदि कंस यह भी देख सकता कि देवकी की आठवीं सन्तान लडक़ी होगी तो भी उसे सन्देह नहीं रहता कि आठवीं सन्तान से उसका वध होना है। ‘विश्वकोश’ के अनुसार गर्भ तथा अर्भक दोनों ही शिशु के द्योतक हैं। कंस अपनी बहन के प्रति वत्सल था इसीलिए वह अपनी बहन तथा बहनोई को उनके घर पहुँचाने के लिए रथचालक का काम कर रहा था। किन्तु देवतागण नहीं चाहते थे कि कंस देवकी के प्रति वत्सल रहे अतएव
उन्होंने अदृश्य स्थान से कंस को उसके प्रति उकसाने के लिए प्रोत्साहित किया। यही नहीं, मरीचि के छहों पुत्रों को शाप मिला था कि वे देवकी के गर्भ से जन्म लें और कंस द्वारा वध किए जाने पर उनका उद्धार हो। जब देवकी को पता चला कि कंस उसके गर्भ से जन्म लेने वाले भगवान् के द्वारा मारा जाएगा तो वह अत्यधिक प्रसन्न हुई। वहसे शब्द भी सार्थक है क्योंकि यह सूचित करता है कि उस भविष्यवाणी ने कंस को धिक्कारा कि तुम अपने शत्रु की माता को ले जाने वाले वाहक पशु का कार्य कर रहे हो।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥