श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 8

 
श्लोक
रोहिण्यास्तनय: प्रोक्तो राम: सङ्कर्षणस्त्वया ।
देवक्या गर्भसम्बन्ध: कुतो देहान्तरं विना ॥ ८ ॥
 
शब्दार्थ
रोहिण्या:—बलदेव की माता रोहिणी देवी का; तनय:—पुत्र; प्रोक्त:—विख्यात; राम:—बलराम; सङ्कर्षण:—संकर्षण और कोई नहीं, बलराम हैं, जो चतुर्व्यूह (संकर्षण, अनिरुद्ध, प्रद्युम्न तथा वासुदेव) में प्रथम हैं; त्वया—आपके द्वारा (ऐसा कहा जाता है); देवक्या:—कृष्ण की माता, देवकी का; गर्भ-सम्बन्ध:—गर्भ सम्बन्धी; कुत:—कैसे; देह-अन्तरम्—शरीरों के स्थानान्तरण के; विना—बिना ।.
 
अनुवाद
 
 हे शुकदेव गोस्वामी, आप पहले ही बता चुके हैं कि द्वितीय चतुर्व्यूह से सम्बन्धित संकर्षण रोहिणी के पुत्र बलराम के रूप में प्रकट हुए। यदि बलराम को एक शरीर से दूसरे शरीर में स्थानान्तरित न किया गया होता तो यह कैसे सम्भव हो पाता कि वे पहले देवकी के गर्भ में रहते और बाद में रोहिणी के गर्भ में? कृपया मुझसे इसकी व्याख्या कीजिए।
 
तात्पर्य
 यहाँ पर एक प्रश्न उठाया गया है, जो विशेष रूप से साक्षात् संकर्षण, बलराम को समझने की ओर लक्ष्यित है। यह प्रसिद्ध है कि बलराम रोहिणी के पुत्र थे, किन्तु
यह भी ज्ञात है कि वे देवकी के पुत्र थे। परीक्षित महाराज इस रहस्य को जानना चाहते थे कि बलराम देवकी तथा रोहिणी दोनों ही के पुत्र किस तरह थे?
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥