श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 9

 
श्लोक
कस्मान्मुकुन्दो भगवान् पितुर्गेहाद् व्रजं गत: ।
क्‍व वासं ज्ञातिभि: सार्धं कृतवान् सात्वतांपति: ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
कस्मात्—क्यों; मुकुन्द:—हर एक को मोक्ष देने वाले कृष्ण; भगवान्—भगवान्; पितु:—अपने पिता (वसुदेव) के; गेहात्— घर से; व्रजम्—व्रजधाम या व्रजभूमि; गत:—गये; क्व—कहाँ; वासम्—रहने के लिए रखा; ज्ञातिभि:—उनके सम्बन्धियों के; सार्धम्—साथ; कृतवान्—कर दिया; सात्वताम् पति:—समस्त वैष्णव भक्तों के स्वामी ।.
 
अनुवाद
 
 भगवान् कृष्ण ने अपने पिता वसुदेव का घर क्यों छोड़ा और अपने को वृन्दावन में नन्द के घर क्यों स्थानान्तरित किया? यदुवंश के स्वामी अपने सम्बन्धियों के साथ वृन्दावन में कहाँ रहे?
 
तात्पर्य
 ये कृष्ण के परिभ्रमण-विषयक प्रश्न हैं। मथुरा में वसुदेव के घर में जन्म लेने के तुरन्त बाद कृष्ण यमुना के उस पार गोकुल गाँव चले गये और कुछ दिनों के बाद वे अपने पिता, माता तथा अन्य सम्बन्धियों के साथ नन्द गाँव, वृन्दावन चले गये। महाराज परीक्षित कृष्ण की वृन्दावन लीलाओं को सुनने के लिए अत्यन्त उत्सुक थे। श्रीमद्भागवत का यह सम्पूर्ण स्कन्ध वृन्दावन
तथा द्वारका में सम्पन्न लीलाओं से भरा पड़ा है। प्रथम चालीस अध्यायों में कृष्ण के वृन्दावन के कार्यकलापों का वर्णन हुआ है और अगले पचास अध्यायों में कृष्ण की द्वारका लीलाओं का वर्णन है। महाराज परीक्षित ने कृष्ण के विषय में सुनने की अपनी इच्छापूर्ति के लिए शुकदेव गोस्वामी से प्रार्थना की कि वे इन लीलाओं का विस्तार से वर्णन करें।
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥