श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 15

 
श्लोक
कृष्ण कृष्णारविन्दाक्ष तात एहि स्तनं पिब ।
अलं विहारै: क्षुत्क्षान्त: क्रीडाश्रान्तोऽसि पुत्रक ॥ १५ ॥
 
शब्दार्थ
कृष्ण कृष्ण अरविन्द-अक्ष—हे कृष्ण, मेरे बेटे, कमल जैसे नेत्रों वाले कृष्ण; तात—हे प्रिय; एहि—यहाँ आओ; स्तनम्—मेरे स्तन के दूध को; पिब—पियो; अलम् विहारै:—इसके बाद खेलने की कोई आवश्यकता नहीं है; क्षुत्-क्षान्त:—भूख से थका; क्रीडा-श्रान्त:—खेलने से थका हुआ; असि—तुम हो; पुत्रक—हे पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 माता यशोदा ने कहा : हे प्रिय पुत्र कृष्ण, कमलनयन कृष्ण, यहाँ आओ और मेरा दूध पियो। हे प्यारे, तुम भूख से तथा इतनी देर तक खेलने से बहुत थक गये होगे। अब और अधिक खेलना जरूरी नहीं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥