श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 41

 
श्लोक
कदाचिद् यमुनातीरे वत्सांश्चारयतो: स्वकै: ।
वयस्यै: कृष्णबलयोर्जिघांसुर्दैत्य आगमत् ॥ ४१ ॥
 
शब्दार्थ
कदाचित्—कभी; यमुना-तीरे—यमुना के तट पर; वत्सान्—बछड़ों को; चारयतो:—चराते हुए; स्वकै:—अपने; वयस्यै:— अन्य साथियों के साथ; कृष्ण-बलयो:—कृष्ण तथा बलराम दोनों को; जिघांसु:—मारने की इच्छा से; दैत्य:—अन्य असुर; आगमत्—आ पहुँचा ।.
 
अनुवाद
 
 एक दिन जब राम तथा कृष्ण अपने साथियों के साथ यमुना नदी के किनारे अपने बछड़े चरा रहे थे तो उन्हें मारने की इच्छा से वहाँ एक अन्य असुर आया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥