श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 11: कृष्ण की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 5

 
श्लोक
न ते तदुक्तं जगृहुर्न घटेतेति तस्य तत् ।
बालस्योत्पाटनं तर्वो: केचित्सन्दिग्धचेतस: ॥ ५ ॥
 
शब्दार्थ
न—नहीं; ते—सारे गोप; तत्-उक्तम्—बालकों द्वारा कहे गये; जगृहु:—स्वीकार करेंगे; न घटेत—ऐसा नहीं हो सकता; इति— इस प्रकार; तस्य—कृष्ण का; तत्—काम; बालस्य—कृष्ण जैसे बालक का; उत्पाटनम्—जड़ समेत उखाडऩा; तर्वो:—दोनों वृक्षों का; केचित्—किसी ने; सन्दिग्ध-चेतस:—क्या किया जा सकता है इसके विषय में सशंकित (क्योंकि गर्गमुनि ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक नारायण के समान होगा) ।.
 
अनुवाद
 
 तीव्र पितृ-स्नेह के कारण नन्द इत्यादि ग्वालों को विश्वास ही नहीं हुआ कि कृष्ण ने इतने आश्चर्यमय ढंग से वृक्षों को उखाड़ा है। अतएव उन्हें बच्चों के कहने पर विश्वास नहीं हुआ। किन्तु उनमें से कुछ को सन्देह था। वे सोच रहे थे, “चूँकि कृष्ण के लिए भविष्यवाणी की गई थी कि वह नारायण के तुल्य है अतएव हो सकता है कि उसी ने यह किया हो।”
 
तात्पर्य
 एक विचार यह था कि वृक्षों को गिराने जैसा कार्य ऐसे छोटे बालक के लिए असम्भव था। किन्तु कुछेक
को सन्देह था कि कृष्ण को नारायण के तुल्य बतलाया जा चुका है। अतएव ग्वाले दुविधा में थे।
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥