श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी  »  श्लोक 4

 
श्लोक
तथाघवदनान्मृत्यो रक्षित्वा वत्सपालकान् ।
सरित्पुलिनमानीय भगवानिदमब्रवीत् ॥ ४ ॥
 
शब्दार्थ
तथा—तत्पश्चात्; अघ-वदनात्—अघासुर के मुख से; मृत्यो:—साक्षात् मृत्यु; रक्षित्वा—रक्षा करके; वत्स-पालकान्—सारे ग्वालबालों तथा बछड़ों को; सरित्-पुलिनम्—नदी के तट पर; आनीय—लाकर; भगवान्—भगवान् कृष्ण ने; इदम्—ये शब्द; अब्रवीत्—कहे ।.
 
अनुवाद
 
 मृत्यु रूप अघासुर के मुख से बालकों तथा बछड़ों को बचाने के बाद भगवान् कृष्ण उन सब को नदी के तट पर ले आये और उनसे निम्नलिखित शब्द कहे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥