श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी  »  श्लोक 40

 
श्लोक
तावदेत्यात्मभूरात्ममानेन त्रुट्यनेहसा ।
पुरोवदाब्दं क्रीडन्तं दद‍ृशे सकलं हरिम् ॥ ४० ॥
 
शब्दार्थ
तावत्—तब तक; एत्य—लौट कर; आत्म-भू:—ब्रह्मा ने; आत्म-मानेन—अपनी माप के अनुसार; त्रुटि-अनेहसा—क्षण-भर में; पुर:-वत्—पहले की तरह; आ-अब्दम्—एक वर्ष तक; क्रीडन्तम्—खेलते हुए; ददृशे—देखा; स-कलम्—अपने अंशों सहित; हरिम्—भगवान् हरि (श्रीकृष्ण) को ।.
 
अनुवाद
 
 जब ब्रह्मा एक क्षण के बाद (अपनी गणना के अनुसार) वहाँ लौटे तो उन्होंने देखा कि यद्यपि मनुष्य की माप के अनुसार पूरा एक वर्ष बीत चुका है, तो भी कृष्ण उतने समय बाद भी उसी तरह अपने अंशरूप बालकों तथा बछड़ों के साथ खेलने में व्यस्त हैं।
 
तात्पर्य
 ब्रह्मा तो अपने समय के अनुसार क्षण-भर के लिए गये थे किन्तु जब वे लौटे तो मनुष्य की माप के अनुसार एक वर्ष बीत चुका था। विभिन्न लोकों में काल की गणना भिन्न भिन्न होती है। उदाहरणार्थ, मनुष्य द्वारा निर्मित अन्तरिक्षयान एक घंटा पच्चीस मिनट में पृथ्वी का चक्कर लगा सकता है—और इस तरह एक दिन पूरा कर सकता है, जबकि पृथ्वी पर रहने वाले लोगों के लिए दिन में चौबीस घण्टे होते हैं। इसलिए ब्रह्मा का एक क्षण पृथ्वी पर एक वर्ष के तुल्य था। कृष्ण पूरे एक वर्ष इतने रूपों में अपना विस्तार किये रहे किन्तु योगमाया की योजना के फलस्वरूप बलराम के अतिरिक्त अन्य कोई इसे जान नहीं पाया।
ब्रह्मा अपनी गणना के अनुसार एक क्षण बाद यह देखने के लिए लौटे कि उनके द्वारा बालकों तथा बछड़ों को चुराने से कैसा कौतुक हुआ होगा। किन्तु साथ ही वे भयभीत थे कि यह तो आग के साथ खिलवाड़ करना है। कृष्ण उनके स्वामी हैं और कौतुक के लिए उन्होंने कृष्ण के बछड़ों तथा मित्रों को चुराकर शैतानी की है। वे सचमुच उत्सुक थे इसीलिए उन्होंने देरी नहीं की, अपने हिसाब से क्षण-भर बाद ही वे लौट आये। जब ब्रह्मा लौटे तो उन्होंने देखा कि सारे बालक, बछड़े और गौवें कृष्ण के साथ पूर्ववत् खेल रहे हैं। कृष्ण की योगमाया से वही क्रीड़ाएँ बिना किसी परिवर्तन के चल रही थीं।

जिस दिन ब्रह्मा पहले पहल आये थे उस दिन कृष्ण तथा ग्वालबालों के साथ बलराम नहीं जा सके क्योंकि उस दिन उनका जन्मदिन था और उनकी माता ने शान्तिक स्नान के लिए उन्हें घर पर रोक लिया था। इसलिए ब्रह्माजी बलराम को चुरा नहीं पाये थे। अब एक वर्ष बाद ब्रह्मा लौटे, तो यह भी ठीक वही दिन था अत: उस दिन भी बलराम अपनी वर्षगाँठ मनाने के लिए घर पर ही थे। इसीलिए इस श्लोक में यद्यपि उल्लेख है कि ब्रह्मा ने कृष्ण तथा ग्वालबालों को देखा किन्तु बलदेव का उल्लेख नहीं है। यह तो पाँच-छह दिन पूर्व की बात है कि बलदेव ने कृष्ण से गौवों तथा ग्वालों के विलक्षण स्नेह के विषय में पूछा था किन्तु अब जब ब्रह्मा लौट कर आये तो उन्होंने कृष्ण के साथ सारे ग्वालों तथा बछड़ों को उनके अंशरूप में खेलते देखा किन्तु उन्होंने बलदेव को नहीं देखा। पिछले वर्ष की तरह भगवान् बलदेव उस दिन जंगल नहीं गये जब ब्रह्माजी फिर से वहाँ प्रकट हुए थे।

____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥