श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी  »  श्लोक 46

 
श्लोक
तावत् सर्वे वत्सपाला: पश्यतोऽजस्य तत्क्षणात् ।
व्यद‍ृश्यन्त घनश्यामा: पीतकौशेयवासस: ॥ ४६ ॥
 
शब्दार्थ
तावत्—इतने लम्बे समय से; सर्वे—सभी; वत्स-पाला:—बछड़े तथा उन्हें चराने वाले बालक दोनों ही; पश्यत:—देखते हुए; अजस्य—ब्रह्मा के; तत्-क्षणात्—तुरन्त; व्यदृश्यन्त—दिखलाई पड़े; घन-श्यामा:—श्याम बादलों के स्वरूप वाले; पीत- कौशेय-वासस:—पीला रेशमी वस्त्र पहने हुए ।.
 
अनुवाद
 
 जब ब्रह्मा देख रहे थे तो तुरन्त ही सारे बछड़े तथा उन्हें चराने वाले बालक नीले बादलों के रंग वाले स्वरूप में पीले रेशमी वस्त्र पहने हुए प्रकट होने लगे।
 
तात्पर्य
 जब ब्रह्मा मनन कर रहे थे तो सारे बछड़े तथा बालक तुरन्त ही विष्णु मूर्तियों में बदल गये। उनकी आकृतियाँ नीले रंग की थीं और वे पीले वस्त्र पहने थे। ब्रह्मा
अपनी शक्ति तथा कृष्ण की अत्यधिक असीम शक्ति के विषय में सोच-विचार कर रहे थे किन्तु कोई भी निर्णय कर पाने के पूर्व उन्होंने यह अविलम्ब रूपान्तर देखा।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥