श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी  »  श्लोक 7

 
श्लोक
तथेति पाययित्वार्भा वत्सानारुध्य शाद्वले ।
मुक्त्वा शिक्यानि बुभुजु: समं भगवता मुदा ॥ ७ ॥
 
शब्दार्थ
तथा इति—कृष्ण के प्रस्ताव को ग्वालबालों ने स्वीकार कर लिया; पाययित्वा अर्भा:—पानी पीने दिया; वत्सान्—बछड़ों को; आरुध्य—वृक्षों में बाँध कर चरने दिया; शाद्वले—हरी मुलायम घास में; मुक्त्वा—खोल कर; शिक्यानि—पोटली, जिनमें खाने की तथा अन्य वस्तुएँ थीं; बुभुजु:—जाकर आनन्द मनाया; समम्—समान रूप से; भगवता—भगवान् के साथ; मुदा—दिव्य आनन्द में ।.
 
अनुवाद
 
 भगवान् कृष्ण के प्रस्ताव को मान कर ग्वालबालों ने बछड़ों को नदी में पानी पीने दिया और फिर उन्हें वृक्षों से बाँध दिया जहाँ हरी मुलायम घास थी। तब बालकों ने अपने भोजन की पोटलियाँ खोलीं और दिव्य आनन्द से पूरित होकर कृष्ण के साथ खाने लगे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥