श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 13: ब्रह्मा द्वारा बालकों तथा बछड़ों की चोरी  »  श्लोक 9

 
श्लोक
केचित् पुष्पैर्दलै: केचित्पल्लवैरङ्कुरै: फलै: ।
शिग्भिस्त्वग्भिर्द‍ृषद्भ‍िश्च बुभुजु: कृतभाजना: ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
केचित्—कोई; पुष्पै:—फूलों पर; दलै:—फूलों की सुन्दर पत्तियों पर; केचित्—कोई; पल्लवै:—पत्तियों के गुच्छों पर; अङ्कुरै:—फूलों के अंकुरों पर; फलै:—तथा कोई फलों पर; शिग्भि:—कोई डलिया-से डिब्बे में; त्वग्भि:—पेड़ की छाल से; दृषद्भि:—चट्टानों पर; च—और; बुभुजु:—आनन्द मनाया; कृत-भाजना:—खाने की प्लेटें बनाकर ।.
 
अनुवाद
 
 ग्वालबालों में से किसी ने अपना भोजन फूलों पर, किसी ने पत्तियों, फलों या पत्तों के गुच्छों पर, किसी ने वास्तव में ही अपनी डलिया में, तो किसी ने पेड़ की खाल पर तथा किसी ने चट्टानों पर रख लिया। बालकों ने खाते समय इन्हें ही अपनी प्लेटें (थालियाँ) मान लिया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥