श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 28

 
श्लोक
बल: प्रविश्य बाहुभ्यां तालान् सम्परिकम्पयन् ।
फलानि पातयामास मतङ्गज इवौजसा ॥ २८ ॥
 
शब्दार्थ
बल:—बलराम ने; प्रविश्य—घुस कर; बाहुभ्याम्—अपनी दोनों भुजाओं से; तालान्—ताड़ वृक्षों को; सम्परिकम्पयन्— झकझोरते हुए; फलानि—फलों को; पातयाम् आस—गिरा दिया; मतम्-गज:—मतवाला हाथी; इव—सदृश; ओजसा—अपने बल से ।.
 
अनुवाद
 
 भगवान् बलराम सबसे पहले तालवन में प्रविष्ट हुए। तब अपने दोनों हाथों से मतवाले हाथी का बल लगाकर वृक्षों को हिलाने लगे जिससे ताड़ के फल भूमि पर आ गिरें।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥