श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 15: धेनुकासुर का वध  »  श्लोक 37

 
श्लोक
तांस्तानापतत: कृष्णो रामश्च नृप लीलया ।
गृहीतपश्चाच्चरणान् प्राहिणोत्तृणराजसु ॥ ३७ ॥
 
शब्दार्थ
तान् तान्—एक एक करके, वे सभी; आपतत:—आक्रमण करते हुए; कृष्ण:—कृष्ण ने; राम:—बलराम ने; च—तथा; नृप—हे राजन्; लीलया—सरलता से; गृहीत—पकड़ कर; पश्चात्-चरणान्—पिछली टाँगों को; प्राहिणोत्—फेंक दिया; तृण राजसु—ताड़ के वृक्षों के ऊपर ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजन्, जब असुरों ने आक्रमण किया कृष्ण तथा बलराम ने उनकी पिछली टाँगों से पकड़-पकड़ कर उन सब को ताड़ वृक्षों के ऊपर फेंक दिया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥