श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 18: भगवान् बलराम द्वारा प्रलम्बासुर का वध  »  श्लोक 21

 
श्लोक
आचेरुर्विविधा: क्रीडा वाह्यवाहकलक्षणा: ।
यत्रारोहन्ति जेतारो वहन्ति च पराजिता: ॥ २१ ॥
 
शब्दार्थ
आचेरु:—सम्पन्न किया; विविधा:—तरह तरह के; क्रीडा:—खेल; वाह्य—ले जाये जाने वाले द्वारा; वाहक—ले जाने वाला; लक्षणा:—लक्षणों से युक्त; यत्र—जिसमें; आरोहन्ति—चढ़ते हैं; जेतार:—जीतने वाले; वहन्ति—ढोते हैं, ले जाते हैं; च— तथा; पराजिता:—हारने वाले ।.
 
अनुवाद
 
 बालकों ने तरह तरह के खेल खेले जिनमें पीठ पर चढऩा तथा उठाना जैसे खेल होते हैं। इन खेलों में जीतने वाले हार जाने वालों की पीठ पर चढ़ते हैं और हारने वाले उन्हें अपनी पीठ पर चढ़ाते हैं।
 
तात्पर्य
 श्रील सनातन गोस्वामी ने विष्णु पुराण (५.९.१२) से निम्नलिखित श्लोक इस संदर्भ में उद्धृत किया है—
हरिणाक्रीडनं नाम बालक्रीडणकं तत:।

प्रकीडता हि ते सर्वे द्वौ द्वौ युगपदुत्पतन् ॥

“इसके बाद उन्होंने बालकों का खेल खेला जो हरिणा क्रीडनम् कहलाता है, जिसमें प्रत्येक बालक विपक्ष से अपनी जोड़ी बनाता है और सारे बालक एकसाथ अपने अपने प्रतिद्वन्द्वी पर धावा बोलते हैं।”

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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥