श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 18: भगवान् बलराम द्वारा प्रलम्बासुर का वध  »  श्लोक 23

 
श्लोक
रामसङ्घट्टिनो यर्हि श्रीदामवृषभादय: ।
क्रीडायां जयिनस्तांस्तानूहु: कृष्णादयो नृप ॥ २३ ॥
 
शब्दार्थ
राम-सङ्घट्टिन:—बलराम की टोली के सदस्य; यर्हि—जब; श्रीदाम-वृषभ-आदय:—श्रीदामा, वृषभ तथा अन्य (यथा सुबल); क्रीडायाम्—खेलों में; जयिन:—विजयी; तान् तान्—इनमें से प्रत्येक; ऊहु:—चढ़ाते थे; कृष्ण-आदय:—कृष्ण तथा उनकी टोली के अन्य सदस्य; नृप—हे राजन् ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजा परीक्षित, जब इन खेलों में भगवान् बलराम की टोली के श्रीदामा, वृषभ तथा अन्य सदस्य विजयी होते तो कृष्ण तथा उनके साथियों को उन सबों को अपने ऊपर चढ़ाना पड़ता था।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥