श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 18: भगवान् बलराम द्वारा प्रलम्बासुर का वध  »  श्लोक 24

 
श्लोक
उवाह कृष्णो भगवान् श्रीदामानं पराजित: ।
वृषभं भद्रसेनस्तु प्रलम्बो रोहिणीसुतम् ॥ २४ ॥
 
शब्दार्थ
उवाह—चढ़ाते थे; कृष्ण:—कृष्ण; भगवान्—भगवान्; श्रीदामानम्—अपने भक्त तथा सखा श्रीदामा को; पराजित:—हार कर; वृषभम्—वृषभ को; भद्रसेन:—भद्रसेन; तु—तथा; प्रलम्ब:—प्रलम्ब; रोहिणी-सुतम्—रोहिणी पुत्र (बलराम) को ।.
 
अनुवाद
 
 हार कर, भगवान् श्रीकृष्ण ने श्रीदामा को अपने ऊपर चढ़ा लिया। भद्रसेन ने वृषभ को तथा प्रलम्ब ने रोहिणी पुत्र बलराम को चढ़ा लिया।
 
तात्पर्य
 कोई यह प्रश्न कर सकता है कि भगवान् को उनके मित्र किस तरह हरा सकते हैं। इसका उत्तर यह है कि ईश्वर अपने मूल रूप में अत्यन्त खिलाड़ी प्रकृति के होते हैं और कभी कभी अपने प्रिय मित्रों की इच्छा या बल के समक्ष झुक कर आनन्द लेते हैं। कभी कभी पिता अपने छोटे से प्रिय पुत्र द्वारा
प्रहार किये जाने पर खेल खेल में जमीन पर गिर पड़ता है। स्नेह-भरे इन कार्यों से सारे लोगों को आनन्द प्राप्त होता है। इस तरह श्रीदामा अपने प्रिय मित्र श्रीकृष्ण को जो यों तो पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् थे, प्रसन्न करने के लिए उनके कन्धों पर चढऩे के लिए राजी हो गये।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥