श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 18: भगवान् बलराम द्वारा प्रलम्बासुर का वध  »  श्लोक 30

 
श्लोक
द‍ृष्ट्वा प्रलम्बं निहतं बलेन बलशालिना ।
गोपा: सुविस्मिता आसन्साधु साध्विति वादिन: ॥ ३० ॥
 
शब्दार्थ
दृष्ट्वा—देखकर; प्रलम्बम्—प्रलम्बासुर को; निहतम्—मारा गया; बलेन—बलराम द्वारा; बल-शालिना—बलशाली; गोपा:— ग्वालबाल; सु-विस्मिता:—अत्यन्त चकित; आसन्—हुए; साधु साधु—“अति उत्तम,” “अति उत्तम”; इति—ये शब्द; वादिन:—कहते हुए ।.
 
अनुवाद
 
 ग्वालबाल यह देखकर अत्यन्त चकित थे कि बलशाली बलराम ने किस तरह प्रलम्बासुर को मार डाला और वे सभी “बहुत खूब” “बहुत खूब” कहकर चिल्ला उठे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥