श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 22: कृष्ण द्वारा अविवाहिता गोपियों का चीरहरण  »  श्लोक 24

 
श्लोक
तासां विज्ञाय भगवान् स्वपादस्पर्शकाम्यया ।
धृतव्रतानां सङ्कल्पमाह दामोदरोऽबला: ॥ २४ ॥
 
शब्दार्थ
तासाम्—उन; विज्ञाय—जानकर; भगवान्—भगवान् के; स्व-पाद—अपने पाँवों का; स्पर्श—स्पर्श पाने; काम्यया—इच्छा से; धृत-व्रतानाम्—व्रत धारण करने वाली; सङ्कल्पम्—संकल्प; आह—बोले; दामोदर:—भगवान् दामोदर; अबला:—लड़कियों से ।.
 
अनुवाद
 
 भगवान् उन गोपियों के द्वारा किये जा रहे कठोर व्रत के संकल्प को समझ गये। वे यह भी जान गये कि ये बालाएँ उनके चरणकमलों का स्पर्श करना चाहती हैं अत: भगवान् दामोदर कृष्ण उनसे इस प्रकार बोले।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥