श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 3: कृष्ण जन्म  »  श्लोक 6

 
श्लोक
जगु: किन्नरगन्धर्वास्तुष्टुवु: सिद्धचारणा: ।
विद्याधर्यश्च ननृतुरप्सरोभि: समं मुदा ॥ ६ ॥
 
शब्दार्थ
जगु:—शुभ गीत गाए; किन्नर-गन्धर्वा:—विभिन्न लोकों के निवासी किन्नर तथा गन्धर्व; तुष्टुवु:—स्तुतियाँ कीं; सिद्ध- चारणा:—स्वर्ग के अन्य निवासी सिद्ध तथा चारणों ने; विद्याधर्य: च—और विद्याधरियाँ, स्वर्गलोक के अन्य निवासी; ननृतु:—आनन्दपूर्वक नृत्य किया; अप्सरोभि:—अप्सराओं के, स्वर्ग की सुन्दर नर्तिकाएँ; समम्—साथ; मुदा—प्रमुदित होकर ।.
 
अनुवाद
 
 किन्नर तथा गन्धर्व शुभ गीत गाने लगे, सिद्धों तथा चारणों ने शुभ प्रार्थनाएँ कीं तथा अप्सराओं के साथ विद्याधरियाँ प्रसन्नता से नाचने लगीं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥