श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 1

 
श्लोक
श्रीशुक उवाच
बहिरन्त:पुरद्वार: सर्वा: पूर्ववदावृता: ।
ततो बालध्वनिं श्रुत्वा गृहपाला: समुत्थिता: ॥ १ ॥
 
शब्दार्थ
श्री-शुक: उवाच—श्रीशुकदेव गोस्वामी ने कहा; बहि:-अन्त:-पुर-द्वार:—घर के भीतरी तथा बाहरी दरवाजे; सर्वा:—सारे; पूर्व-वत्—पहले की तरह; आवृता:—बन्द; तत:—तत्पश्चात्; बाल-ध्वनिम्—नवजात शिशु का रोदन; श्रुत्वा—सुनकर; गृह पाला:—घर के सारे वासी विशेषतया द्वारपाल; समुत्थिता:—जग गए ।.
 
अनुवाद
 
 श्रीशुकदेव गोस्वामी ने कहा : हे राजा परीक्षित, घर के भीतरी तथा बाहरी दरवाजे पूर्ववत् बन्द हो गए। तत्पश्चात् घर के रहने वालों ने, विशेष रूप से द्वारपालों ने, नवजात शिशु का क्रन्दन सुना और अपने बिस्तरों से उठ खड़े हुए।
 
तात्पर्य
 इस अध्याय में योगमाया के कार्यकलाप प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर होते हैं देवकी तथा वसुदेव कंस के भ्रामक नृशंस कार्यों को क्षमा कर देते हैं और कंस पश्चात्ताप करता हुआ उनके चरणों पर गिर पड़ता है। बंदीगृह के द्वारपालों तथा अन्य लोगों के जगने के पूर्व अनेक घटनाएँ घटीं। कृष्ण का जन्म हुआ और वे गोकुल में यशोदा के घर पहुँचा दिए गए, सुदृढ़ दरवाजे खुले और फिर बन्द हो गए और वसुदेव पुन: लोहे की शृंखलाओं में जकड़ गए। किन्तु द्वारपाल यह सब नहीं जान पाए। वे तो तब जगे जब उन्होंने नवजात शिशु योगमाया को चिल्लाते सुना।
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने कहा है कि ये द्वारपाल कुत्तों के तुल्य थे। रात में कुत्ते सडक़ों पर द्वारपाल जैसा कार्य करते हैं। यदि एक कुत्ता भूँकता है, तो सब कुत्ते उसी समय भूँकने लगते हैं। यद्यपि इन कुत्तों को द्वारपाल का कार्य करने के लिए कोई नियुक्त नहीं करता, किन्तु वे अपने पड़ोस की रक्षा करना अपना कर्तव्य समझते हैं और ज्योंही कोई अज्ञात व्यक्ति प्रवेश करता है, तो वे तुरन्त भूँकने लगते हैं। योगमाया तथा महामाया दोनों ही अनेक भौतिक कार्यकलापों में काम करती हैं (प्रकृते: क्रियमाणानि गुणै कर्माणि सर्वश:) किन्तु यद्यपि भगवान् की शक्ति उनके अपने निर्देशानुसार कार्य करती है (मयाध्यक्षेण प्रकृति: सूयते सचराचरम् ) किन्तु कुत्ते-सदृश राजनीतिज्ञ तथा कूटनीतिज्ञ सोचते हैं कि वे बाह्यजगत के खतरों से अपने पड़ोस को सुरक्षित रखते हैं। ये माया के कार्य हैं। किन्तु जो कृष्ण शरण में चला जाता है, वह इस जगत के इन कुत्तों तथा कुत्तों जैसे अभिभावकों द्वारा प्रदत्त संरक्षण से मुक्ति पा लेता है।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥