श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 4: राजा कंस के अत्याचार  »  श्लोक 9

 
श्लोक
सा तद्धस्तात् समुत्पत्य सद्यो देव्यम्बरं गता ।
अद‍ृश्यतानुजा विष्णो: सायुधाष्टमहाभुजा ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
सा—वह कन्या; तत्-हस्तात्—कंस के हाथ से; सम्-उत्पत्य—छूटकर; सद्य:—तुरन्त; देवी—देवी के रूप में; अम्बरम्— आकाश में; गता—चली गई; अदृश्यत—देखी गई; अनुजा—छोटी बहन; विष्णो:—भगवान् की; स-आयुधा—हथियारों सहित; अष्ट—आठ; महा-भुजा—बड़ी-बड़ी भुजाओं वाली ।.
 
अनुवाद
 
 वह कन्या, योगमाया देवी जो भगवान् विष्णु की छोटी बहन थी, कंस के हाथ से छूट कर ऊपर की ओर चली गई और आकाश में हथियारों से युक्त आठ भुजाओं वाली देवी—देवी दुर्गा—के रूप में प्रकट हुई।
 
तात्पर्य
 कंस ने कन्या को नीचे पत्थर पर पटकना चाहा, किन्तु वह तो भगवान् विष्णु की छोटी बहन योगमाया थी अत: हाथ से छूटकर ऊपर चली गई और देवी दुर्गा का रूप धारण कर लिया। अनुजा शब्द महत्त्वपूर्ण
है। इसका अर्थ है, “छोटी बहन।” जब विष्णु या कृष्ण ने देवकी से जन्म लिया तो उसी समय उन्होंने यशोदा के गर्भ से भी जन्म लिया होगा। अन्यथा योगमाया भगवान् की छोटी बहन कैसे बनती?
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥