श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 42: यज्ञ के धनुष का टूटना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक
तयोस्तदद्भुतं वीर्यं निशाम्य पुरवासिन: ।
तेज: प्रागल्भ्यं रूपं च मेनिरे विबुधोत्तमौ ॥ २२॥
 
शब्दार्थ
तयो:—उन दोनों के; तत्—उस; अद्भुतम्—अद्भुत; वीर्यम्—वीरतापूर्ण कार्य को; निशाम्य—देखकर; पुर-वासिन:—नगर निवासी; तेज:—उनके तेज; प्रागल्भ्यम्—प्रगल्भता, साहस; रूपम्—सौन्दर्य को; च—तथा; मेनिरे—उन्होंने सोचा; विबुध— देवता; उत्तमौ—दो श्रेष्ठ ।.
 
अनुवाद
 
 कृष्ण तथा बलराम द्वारा किये गये अद्भुत कार्य तथा उनके बल, साहस एवं सौन्दर्य को देखकर नगरवासियों ने सोचा कि वे अवश्य ही दो मुख्य देवता हैं।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥