श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 44: कंस वध  »  श्लोक 49

 
श्लोक
श्रीशुक उवाच
राजयोषित आश्वास्य भगवाँल्लोकभावन: ।
यामाहुर्लौकिकीं संस्थां हतानां समकारयत् ॥ ४९ ॥
 
शब्दार्थ
श्री-शुक: उवाच—शुकदेव गोस्वामी ने कहा; राज—राजा (तथा उसके भाइयों) की; योषित:—पत्नियों को; आश्वास्य— आश्वासन देकर; भगवान्—भगवान्; लोक—समस्त लोकों के; भावन:—पोषणकर्ता; याम्—जो; आहु:—वे (वेदादि) आदेश देते हैं; लौकिकीम् संस्थाम्—लोकरीति, दाह-संस्कार; हतानाम्—मृतकों के लिए; समकारयत्—किये जाने की व्यवस्था की ।.
 
अनुवाद
 
 शुकदेव गोस्वामी ने कहा : रानियों को सान्त्वना देने के बाद समस्त जगतों के पालनकर्ता भगवान् कृष्ण ने नियत दाह-संस्कार सम्पन्न किये जाने की व्यवस्था की।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥