श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 44: कंस वध  »  श्लोक 6

 
श्लोक
तद् बलाबलवद्युद्धं समेता: सर्वयोषित: ।
ऊचु: परस्परं राजन् सानुकम्पा वरूथश: ॥ ६ ॥
 
शब्दार्थ
तत्—वह; बल-अबल—बली तथा निर्बल; वत्—के बीच; युद्धम्—लड़ाई; समेता:—एकत्र; सर्व—सभी; योषित:—स्त्रियों ने; ऊचु:—कहा; परस्परम्—एक-दूसरे से; राजन्—हे राजन् (परीक्षित); स-अनुकम्पा:—दया का अनुभव करती; वरूथश:—झुंड की झुंड ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजन्, वहाँ पर उपस्थित सारी स्त्रियों ने बलवान् तथा निर्बल के बीच होने वाली इस अनुचित लड़ाई पर विचार करते हुए दया के कारण अत्यधिक चिन्ता का अनुभव किया। वे अखाड़े के चारों ओर झुंड की झुंड एकत्र हो गईं और परस्पर इस तरह बातें करने लगीं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥