श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 28

 
श्लोक
अथ कृष्णविनिर्दिष्ट: स एव द्विजसत्तम: ।
अन्त:पुरचरीं देवीं राजपुत्रीं ददर्श ह ॥ २८ ॥
 
शब्दार्थ
अथ—तत्पश्चात; कृष्ण-विनिर्दिष्ट:—कृष्ण द्वारा आदेश दिया गया; स:—वह; एव—ही; द्विज—विद्वान ब्राह्मण; सत्-तम:— परम शुद्ध; अन्त:-पुर—भीतरी महल में; चरीम्—ठहरी हुई; देवीम्—देवी रुक्मिणी को; राज—राजा की; पुत्रीम्—पुत्री को; ददर्श ह—देखा ।.
 
अनुवाद
 
 तभी वह शुद्धतम विद्वान ब्राह्मण, कृष्ण के आदेशानुसार दिव्य राजकुमारी रुक्मिणी से भेंट करने राजमहल के अन्त:पुर में आया।
 
तात्पर्य
 श्रील श्रीधर स्वामी के अनुसार श्रीकृष्ण नगर के बाहर उद्यान में आ चुके थे और रुक्मिणी की चिन्ता
को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ब्राह्मण को बताया था कि वह जाकर उनके आगमन का समाचार दे।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥