श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 30

 
श्लोक
तस्या आवेदयत् प्राप्तं शशंस यदुनन्दनम् ।
उक्तं च सत्यवचनमात्मोपनयनं प्रति ॥ ३० ॥
 
शब्दार्थ
तस्या:—उससे; आवेदयत्—सूचना दी; प्राप्तम्—आकर; शशंस—बतलाया; यदु-नन्दनम्—यदुओं के पुत्र कृष्ण ने; उक्तम्— जो कहा था; च—तथा; सत्य—आश्वासन के; वचनम्—शब्द; आत्म—उसके साथ; उपनयनम्—विवाह के; प्रति—विषय में ।.
 
अनुवाद
 
 ब्राह्मण ने उनसे यदुनन्दन के आगमन की सूचना सुनाई और उनके साथ विवाह करने के भगवान् के वचन को कह सुनाया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥