श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 34

 
श्लोक
तयोर्निवेशनं श्रीमदुपाकल्प्य महामति: ।
ससैन्ययो: सानुगयोरातिथ्यं विदधे यथा ॥ ३४ ॥
 
शब्दार्थ
तयो:—दोनों के लिए; निवेशनम्—ठहरने का स्थान; श्री-मत्—ऐश्वर्यशाली, भव्य; उपाकल्प्य—व्यवस्था करके; महा- मति:—उदार; स—सहित; सैन्ययो:—उनके सैनिकों; स—सहित; अनुगयो:—उनके निजी संगियों; आतिथ्यम्—सत्कार; विदधे—किया; यथा—उचित रीति से ।.
 
अनुवाद
 
 उदार राजा ने दोनों प्रभुओं के लिए तथा उनकी सेना एवं उनके संगियों के लिए भव्य आवासों की व्यवस्था की। इस तरह उसने उनको समुचित आतिथ्य प्रदान किया।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥