श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 35

 
श्लोक
एवं राज्ञां समेतानां यथावीर्यं
यथावय: । यथाबलं यथावित्तं सर्वै: कामै: समर्हयत् ॥ ३५ ॥
 
शब्दार्थ
एवम्—इस प्रकार; राज्ञाम्—राजाओं के लिए; समेतानाम्—एकत्र हुए; यथा—के अनुसार; वीर्यम्—उनके पराक्रम; यथा—के अनुसार; वय:—उनकी आयु; यथा—के अनुसार; बलम्—उनकी शक्ति; यथा—के अनुसार; वित्तम्—उनकी सम्पत्ति; सर्वै:— समस्त; कामै:—इच्छित वस्तुओं से; समर्हयत्—उनका आदर किया ।.
 
अनुवाद
 
 इस तरह भीष्मक ने इस अवसर पर एकत्र हुए राजाओं को सारी वांछित वस्तुएँ प्रदान कीं और उनकी राजनैतिक शक्ति, आयु, शारीरिक बल तथा सम्पत्ति के अनुसार उनका सम्मान किया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥