श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 39

 
श्लोक
एवं प्रेमकलाबद्धा वदन्ति स्म
पुरौकस: । कन्या चान्त:पुरात् प्रागाद् भटैर्गुप्ताम्बिकालयम् ॥ ३९ ॥
 
शब्दार्थ
एवम्—इस प्रकार; प्रेम—शुद्ध प्रेम की; कला—वृद्धि से; बद्धा:—बँधे हुए; वदन्ति स्म—बोल रहे थे; पुर-ओकस:— नगरनिवासी; कन्या—दुलहन; च—तथा; अन्त:-पुरात्—अन्त:पुर से; प्रागात्—बाहर गई; भटै:—अंगरक्षकों द्वारा; गुप्ता— रक्षित; अम्बिका-आलयम्—देवी अम्बिका के मन्दिर तक ।.
 
अनुवाद
 
 अपने उमड़ते प्रेम से बँध कर नगर के निवासी इस तरह की बातें कर रहे थे। तभी अंगरक्षकों से संरक्षित दुलहन अम्बिका के मन्दिर में जाने के लिए अंत:पुर से बाहर आई।
 
तात्पर्य
 श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कला की परिभाषा मेदिनी कोश से उद्धृत की है, जो इस प्रकार है—कला मूले
प्रवृद्धौ स्याच्छिलादावंशमात्रके—कला शब्द के अर्थ हैं—जड़, वृद्धि, पत्थर या केवल अंश।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥