श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 49

 
श्लोक
तस्यै स्‍त्रियस्ता: प्रददु: शेषां युयुजुराशिष: ।
ताभ्यो देव्यै नमश्चक्रे शेषां च जगृहे वधू: ॥ ४९ ॥
 
शब्दार्थ
तस्यै—रुक्मिणी को; स्त्रिय:—स्त्रियों ने; ता:—उन; प्रददु:—दिया; शेषाम्—बचा हुआ (प्रसाद); युयुजु:—प्रदान किया; आशिष:—आशीर्वाद; ताभ्य:—उनको; देव्यै—तथा देवी को; नम: चक्रे—नमस्कार किया; शेषाम्—बचा हुआ (प्रसाद); च—तथा; जगृहे—ग्रहण किया; वधू:—दुलहन ने ।.
 
अनुवाद
 
 स्त्रियों ने दुलहन को प्रसाद दिया और फिर आशीर्वाद प्रदान किया। उसने भी उन्हें तथा देवी को नमस्कार किया और प्रसाद ग्रहण किया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥