श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 53: कृष्ण द्वारा रुक्मिणी का अपहरण  »  श्लोक 5

 
श्लोक
स चाश्वै: शैब्यसुग्रीवमेघपुष्पबलाहकै: ।
युक्तं रथमुपानीय तस्थौ प्राञ्जलिरग्रत: ॥ ५ ॥
 
शब्दार्थ
स:—वह, दारुक; च—तथा; अश्वै:—घोड़ों से; शैब्य-सुग्रीव-मेघपुष्प-बलाहकै:—शैब्य, सुग्रीव, मेघपुष्प तथा बलाहक नामक; युक्तम्—जोता; रथम्—रथ को; उपानीय—लाकर; तस्थौ—खड़ा हुआ; प्राञ्जलि:—आदरपूर्वक हाथ जोड़ कर; अग्रत:—सामने ।.
 
अनुवाद
 
 दारुक भगवान् का रथ ले आया जिसमें शैब्य, सुग्रीव, मेघपुष्प तथा बलाहक नामक घोड़े जुते थे। फिर वह अपने हाथ जोड़ कर भगवान् कृष्ण के सामने खड़ा हो गया।
 
तात्पर्य
 श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती पद्म पुराण से उद्धरण देते हैं जिसमें भगवान् कृष्ण के रथ के घोड़ों का वर्णन हुआ है—
शैब्यस्तु शुकपत्राभ: सुग्रीवो हेमपिंगल:।

मेघपुष्पस्तु मेघाभ: पाण्डुरो च बलाहक: ॥

“शैब्य तोते के पंखों जैसे रंग वाला था, सुग्रीव पीला सुनहरा था, मेघपुष्प बादल के रंग का और बलाहक कुछ कुछ सफेद रंग का था।”

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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥