श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 6: पूतना वध  »  श्लोक 25-26

 
श्लोक
पृश्न‍िगर्भस्तु ते बुद्धिमात्मानं भगवान् पर: ।
क्रीडन्तं पातु गोविन्द: शयानं पातु माधव: ॥ २५ ॥
व्रजन्तमव्याद्वैकुण्ठ आसीनं त्वां श्रिय: पति: ।
भुञ्जानं यज्ञभुक् पातु सर्वग्रहभयङ्कर: ॥ २६ ॥
 
शब्दार्थ
पृश्निगर्भ:—भगवान् पृश्निगर्भ; तु—निस्सन्देह; ते—तुम्हारी; बुद्धिम्—बुद्धि को; आत्मानम्—आत्मा को; भगवान्—भगवान; पर:—दिव्य; क्रीडन्तम्—खेलते हुए; पातु—रक्षा करें; गोविन्द:—गोविन्द; शयानम्—सोते समय; पातु—रक्षा करें; माधव:— भगवान् माधव; व्रजन्तम्—चलते हुए; अव्यात्—रक्षा करें; वैकुण्ठ:—भगवान् वैकुण्ठ; आसीनम्—बैठे हुए; त्वाम्—तुमको; श्रिय: पति:—लक्ष्मीपति, नारायण; भुञ्जानम्—जीवन का भोग करते हुए; यज्ञभुक्—यज्ञभुक; पातु—रक्षा करें; सर्व-ग्रह भयम्-कर:—जो सारे दुष्ट ग्रहों को भय देने वाले ।.
 
अनुवाद
 
 भगवान् प्रश्निगर्भ तुम्हारी बुद्धि की तथा पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् तुम्हारे आत्मा की रक्षा करें। तुम्हारे खेलते समय गोविन्द तथा तुम्हारे सोते समय माधव तुम्हारी रक्षा करें। भगवान् वैकुण्ठ तुम्हारे चलते समय तथा लक्ष्मीपति नारायण तुम्हारे बैठते समय तुम्हारी रक्षा करें। इसी तरह भगवान् यज्ञभुक, जिनसे सारे दुष्टग्रह भयभीत रहते हैं तुम्हारे भोग के समय सदैव तुम्हारी रक्षा करें।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥