श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 63: बाणासुर और भगवान् कृष्ण का युद्ध  »  श्लोक 9

 
श्लोक
ब्रह्मादय: सुराधीशा मुनय: सिद्धचारणा: ।
गन्धर्वाप्सरसो यक्षा विमानैर्द्रष्टुमागमन् ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
ब्रह्म-आदय:—ब्रह्मा इत्यादि; सुर—देवताओं के; अधीशा:—शासक; मुनय:—मुनिगण; सिद्ध-चारणा:—सिद्ध तथा चारण देवतागण; गन्धर्व-अप्सरस:—गन्धर्व तथा अप्सराएँ; यक्षा:—यक्षगण; विमानै:—विमानों से; द्रष्टुम्—देखने के लिए; आगमन्—आये ।.
 
अनुवाद
 
 सिद्धों, चारणों, महामुनियों, गन्धर्वों, अप्सराओं तथा यक्षों के साथ ब्रह्मा तथा अन्य शासक देवतागण अपने अपने दिव्य विमानों में चढ़ कर (युद्ध) देखने आये।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥