श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 73: बन्दी-गृह से छुड़ाये गये राजाओं को कृष्ण द्वारा आशीर्वाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।
प्रणतक्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम: ॥ १६ ॥
 
शब्दार्थ
कृष्णाय—कृष्ण के प्रति; वासुदेवाय—वसुदेव के पुत्र के प्रति; हरये—भगवान् हरि के प्रति; परम-आत्मने—परमात्मा; प्रणत—शरणागत; क्लेश—कष्ट के; नाशाय—नष्ट करने वाले के प्रति; गोविन्दाय—गोविन्द के प्रति; नम: नम:—बारम्बार नमस्कार ।.
 
अनुवाद
 
 हम वसुदेव के पुत्र भगवान् कृष्ण अर्थात् हरि को बारम्बार नमस्कार करते हैं। वह परमात्मा गोविन्द उन सबों के कष्टों को दूर कर देता है, जो उनकी शरण में जाते हैं।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥