श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 14

 
श्लोक
तं च षोडशभिर्विद्ध्वा बाणै: सौभं च खे भ्रमत् ।
अविध्यच्छरसन्दोहै: खं सूर्य इव रश्मिभि: ॥ १४ ॥
 
शब्दार्थ
तम्—उसको, शाल्व को; च—तथा; षोडशभि:—सोलह; विद्ध्वा—बेध कर; बाणै:—बाणों से; सौभम्—सौभ को; च— भी; खे—आकाश में; भ्रमत्—घूमते हुए; अविध्यत्—प्रहार किया; शर—बाणों से; सन्दोहै:—मूसलाधार वर्षा से; खम्— आकाश को; सूर्य:—सूर्य; इव—सदृश; रश्मिभि:—अपनी किरणों से ।.
 
अनुवाद
 
 तब भगवान् कृष्ण ने शाल्व को सोलह बाणों से बेध दिया तथा आकाश में इधर-उधर घूमते हुए सौभ विमान पर बाणों की वर्षा से प्रहार किया। बाणों की वर्षा करते हुए भगवान् उस सूर्य की तरह लग रहे थे, जो अपनी किरणों से आकाश को आप्लावित करता है।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥