श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 15

 
श्लोक
शाल्व: शौरेस्तु दो: सव्यं सशार्ङ्गं शार्ङ्गधन्वन: ।
बिभेद न्यपतद्धस्ताच्छार्ङ्गमासीत्तदद्भ‍ुतम् ॥ १५ ॥
 
शब्दार्थ
शाल्व:—शाल्व; शौरे:—भगवान् कृष्ण के; तु—लेकिन; दो:—बाहु; सव्यम्—बाईं; स—सहित; शार्ङ्गम्—भगवान् का धनुष, जो शार्ङ्ग कहलाता है; शार्ङ्ग-धन्वन:—शाङ्र्गधन्वा कहलाने वाले; बिभेद—प्रहार किया; न्यपतत्—गिर पड़ा; हस्तात्—हाथ से; शार्ङ्गम्—शार्ङ्ग धनुष; असीत्—था; तत्—यह; अद्भुतम्—विचित्र ।.
 
अनुवाद
 
 तब शाल्व ने भगवान् कृष्ण की बाईं बाँह पर प्रहार किया, जिसमें वे अपना शार्ङ्ग धनुष पकड़े थे। विचित्र बात यह हुई कि यह धनुष उनके हाथ से गिर गया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥