श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 16

 
श्लोक
हाहाकारो महानासीद् भूतानां तत्र पश्यताम् ।
निनद्य सौभराडुच्चैरिदमाह जनार्दनम् ॥ १६ ॥
 
शब्दार्थ
हाहा-कार:—निराशा की चिल्लाहट; महान्—अत्यधिक; आसीत्—हुई; भूतानाम्—जीवों में; तत्र—वहाँ; पश्यताम्—देख रहे; निनद्य—गरजकर; सौभ-राट्—सौभ के स्वामी ने; उच्चै:—तेजी से; इदम्—यह; आह—कहा; जनार्दनम्—कृष्ण से ।.
 
अनुवाद
 
 जो यह घटना देख रहे थे, वे सब हाहाकार करने लगे। तब सौभ के स्वामी ने जोर-जोर से गरजकर जनार्दन से इस प्रकार कहा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥