श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 23

 
श्लोक
निशम्य विप्रियं कृष्णो मानुषीं प्रकृतिं गत: ।
विमनस्को घृणी स्‍नेहाद् बभाषे प्राकृतो यथा ॥ २३ ॥
 
शब्दार्थ
निशम्य—सुनकर; विप्रियम्—क्षुब्ध करने वाले शब्दों को; कृष्ण:—भगवान् कृष्ण ने; मानुषीम्—मनुष्य की तरह; प्रकृतिम्— स्वभाव; गत:—बनाकर; विमनस्क:—दुखी; घृणी—करुणापूर्ण; स्नेहात्—स्नेह के वशीभूत; बभाषे—बोले; प्राकृत:— सामान्य व्यक्ति; यथा—जिस तरह ।.
 
अनुवाद
 
 जब उन्होंने यह क्षुब्धकारी समाचार सुना, तो सामान्य मनुष्य की भूमिका निर्वाह कर रहे भगवान् कृष्ण ने खेद तथा करुणा व्यक्त की और अपने माता-पिता के प्रति प्रेमवश उन्होंने सामान्य बद्धजीव जैसे शब्द कहे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥