श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 25

 
श्लोक
इति ब्रुवाणे गोविन्दे सौभराट् प्रत्युपस्थित: ।
वसुदेवमिवानीय कृष्णं चेदमुवाच स: ॥ २५ ॥
 
शब्दार्थ
इति—इस प्रकार; ब्रुवाणे—कहते हुए; गोविन्दे—कृष्ण के; सौभ-राट्—सौभ का स्वामी (शाल्व); प्रत्युपस्थित:—आगे आया; वसुदेवम्—कृष्ण के पिता वसुदेव; इव—सदृश; आनीय—आगे करके; कृष्णम्—कृष्ण से; च—तथा; इदम्—यह; उवाच—कहा; स:—उसने ।.
 
अनुवाद
 
 जब गोविन्द ये शब्द कह चुके, तो भगवान् के समक्ष वसुदेव जैसे दिखने वाले किसी पुरुष को लेकर सौभ-पति पुन: प्रकट हुआ। तब शाल्व ने इस प्रकार कहा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥