श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 26

 
श्लोक
एष ते जनिता तातो यदर्थमिह जीवसि ।
वधिष्ये वीक्षतस्तेऽमुमीशश्चेत् पाहि बालिश ॥ २६ ॥
 
शब्दार्थ
एष:—यह; ते—तुम्हारा; जनिता—जन्म देने वाला पिता; तात:—प्रिय; यत्-अर्थम्—जिसके लिए; इह—इस जगत में; जीवसि—तुम जीवित हो; वधिष्ये—मैं मार डालूँगा; वीक्षत: ते—तुम्हारे देखते-देखते; अमुम्—उसको; ईश:—समर्थ; चेत्— यदि; पाहि—उसकी रक्षा करो; बालिश—रे मूर्ख ।.
 
अनुवाद
 
 [शाल्व ने कहा] : यह रहा तुम्हें जन्म देने वाला तुम्हारा पिता, जिसके लिए तुम इस जगत में जीवित हो। अब मैं तुम्हारी आँखों के सामने इसका वध कर दूँगा। रे मूर्ख! यदि तुम इसे बचा सको तो बचाओ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥