श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 34

 
श्लोक
तत् कृष्णहस्तेरितया विचूर्णितं
पपात तोये गदया सहस्रधा ।
विसृज्य तद् भूतलमास्थितो गदा-
मुद्यम्य शाल्वोऽच्युतमभ्यगाद्‌द्रुतम् ॥ ३४ ॥
 
शब्दार्थ
तत्—वह (सौभ); कृष्ण-हस्त—कृष्ण के हाथ से; ईरितया—घुमाया; विचूर्णितम्—चूर-चूर किया हुआ; पपात—गिर गया; तोये—जल में; गदया—गदा से; सहस्रधा—हजारों खण्डों में; विसृज्य—छोड़ कर; तत्—इस; भू-तलम्—पृथ्वी पर; आस्थित:—खड़ा हुआ; गदाम्—अपनी गदा; उद्यम्य—लेकर; शाल्व:—शाल्व ने; अच्युतम्—भगवान् कृष्ण पर; अभ्यगात्— आक्रमण किया; द्रुतम्—तेजी से ।.
 
अनुवाद
 
 भगवान् कृष्ण की गदा से हजारों खण्डों में चूर-चूर हुआ सौभ विमान समुद्र में गिर गया। शाल्व ने इसे छोड़ दिया और पृथ्वी पर खड़ा हो गया। उसने अपनी गदा उठाई और भगवान् अच्युत की ओर लपका।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥