श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 5

 
श्लोक
एवं यदूनां शाल्वानां निघ्नतामितरेतरम् ।
युद्धं त्रिनवरात्रं तदभूत्तुमुलमुल्बणम् ॥ ५ ॥
 
शब्दार्थ
एवम्—इस प्रकार; यदूनाम्—यदुओं के; शाल्वानाम्—तथा शाल्व के अनुयायियों के; निघ्नताम्—प्रहार करते हुए; इतर- इतरम्—एक-दूसरे पर; युद्धम्—युद्ध; त्रि—तीन बार; नव—नौ; रात्रम्—रातों तक; तत्—वह; अभूत्—था; तुमुलम्— घनघोर; उल्बणम्—भयावना ।.
 
अनुवाद
 
 इस तरह यदुगण तथा शाल्व के अनुयायी एक-दूसरे पर आक्रमण करते रहे और यह घनघोर भयानक युद्ध सत्ताईस दिनों तथा रातों तक चलता रहा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥