श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 87: साक्षात् वेदों द्वारा स्तुति  »  श्लोक 4

 
श्लोक
अत्र ते वर्णयिष्यामि गाथां नारायणान्विताम् ।
नारदस्य च संवादमृषेर्नारायणस्य च ॥ ४ ॥
 
शब्दार्थ
अत्र—इस सम्बन्ध में; ते—तुमसे; वर्णयिष्यामि—वर्णन करूँगा; गाथाम्—विवरण; नारायण-अन्विताम्—भगवान् नारायण से सम्बन्धित; नारदस्य—नारद की; च—तथा; संवादम्—वार्ता; ऋषे: नारायणस्य—श्री नारायण ऋषि की; च—तथा ।.
 
अनुवाद
 
 इस सम्बन्ध में मैं तुम से भगवान् नारायण विषयक एक गाथा कहूँगा। यह उस वार्ता के विषय में है, जो श्री नारायण ऋषि तथा नारद मुनि के मध्य हुई थी।
 
तात्पर्य
 भगवान् नारायण निम्नलिखित गाथा से दो प्रकार से जुड़े
हैं—उसके वक्ता तथा उसके विषय के रूप में।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥