श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 90: भगवान् कृष्ण की महिमाओं का सारांश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक
तासां स्‍त्रीरत्नभूतानामष्टौ या: प्रागुदाहृता: ।
रुक्‍मिणीप्रमुखा राजंस्तत्पुत्राश्चानुपूर्वश: ॥ ३० ॥
 
शब्दार्थ
तासाम्—उनमें से; स्त्री—स्त्रियों की; रत्न—रत्न या मणियों जैसी; भूतानाम्—थीं; अष्टौ—आठ; या:—जो; प्राक्—इसके पूर्व; उदाहृता:—वर्णित; रुक्मिणी-प्रमुखा:—रुक्मिणी इत्यादि; राजन्—हे राजा (परीक्षित); तत्—उनके; पुत्रा:—पुत्र; च—भी; अनुपूर्वश:—उसी क्रम में ।.
 
अनुवाद
 
 इन रत्न जैसी स्त्रियों में से रुक्मिणी इत्यादि आठ प्रमुख रानियाँ थीं। हे राजन्, मैं पहले ही इनके पुत्रों के साथ-साथ इनका क्रमिक वर्णन कर चुका हूँ।
 
 
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥