श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 1: कलियुग के पतित वंश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक
सुयशा भविता तस्य सङ्गत: सुयश:सुत: ।
शालिशूकस्ततस्तस्य सोमशर्मा भविष्यति ।
शतधन्वा ततस्तस्य भविता तद् बृहद्रथ: ॥ १३ ॥
 
शब्दार्थ
सुयशा:—सुयशा; भविता—उत्पन्न होगा; तस्य—उसके (अशोकवर्धन के); सङ्गत:—संगत; सुयश:-सुत:—सुयशा का पुत्र; शालिशूक:—शालिशूक; तत:—तत्पश्चात्; तस्य—उस (शालिशूक) के; सोमशर्मा—सोमशर्मा; भविष्यति—होगा; शतधन्वा—शतधन्वा; तत:—तत्पश्चात्; तस्य—उस (सोमशर्मा) के; भविता—होगा; तत्—उस (शतधन्वा) के; बृहद्रथ:—बृहद्रथ ।.
 
अनुवाद
 
 अशोकवर्धन के बाद सुयशा होगा जिसका पुत्र संगत होगा। इसका पुत्र शालिशूक होगा जिसका पुत्र सोमशर्मा होगा। सोमशर्मा का पुत्र शतधन्वा होगा और इसका पुत्र बृहद्रथ कहलायेगा।
 
 
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